अवरोध

कुछ दिन ऐसे होते हैं,
आप आत्मा उड़ेलना चाहते हैं
दिल प्यार से भरना चाहते हैं
उस दिन, प्यार के कुछ और बहाने हैं
आज देर से उठा होगा, शायद
इस कच्ची ठंड में कहीं शीत लग गयी होगी
रात बिस्तर पे पैर पटक रहा होगा
सुबह की चाय भी बेस्वाद लगी होगी
जब आप बुला रहे होंगे उसे
बेचारा ज़ुख़ामी में झल्ला रहा होगा अम्मा पे
बड़ी अजीब सी बात है,
आज प्यार असहाय महसूस कर रहा होगा
आप टिके रहिये वहीं खिड़की पे
ठण्ड की धूप सेकते हुए
राहपरस्तों में ढूँढिये कहानी कोई
क़लम बेवजह काग़ज़ पे टहल रही है
जड़ रही बेजोड़ अक्षर, औने पौने इंसान
क़ायदे का एक हर्फ़ नहीं
कोरे काग़ज़ पे ज्वालामुखी फटने के लिए
एक दिल में भी फटना चाहिए
जब अपनी बाल्टी का लावा उड़ेलेंगे
तब कहीं उस लाल से, एक कविता प्रकट होगी
लेकिन, इन सबसे पहले

दिल लबरेज़ होना चाहता है
और आज प्यार को ज़ुख़ाम है



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